Salmos 105

पवित्र बाइबल (HIN2010)

1 यहोवा का धन्यवाद करो! तुम उसके नाम की उपासना करो।

2 यहोवा के लिये तुम गाओ। तुम उसके प्रशंसा गीत गाओ।

3 यहोवा के पवित्र नाम पर गर्व करो।

4 सामर्थ्य पाने को तुम यहोवा के पास जाओ।

5 उन अद्भुत बातों को स्मरण करो जिनको यहोवा करता है।

6 तुम परमेश्वर के सेवक इब्राहीम के वंशज हो।

7 यहोवा ही हमारा परमेश्वर है।

8 परमेश्वर की वाचा सदा याद रखो।

9 इब्राहीम के साथ परमेश्वर ने वाचा बाँधा था!

10 परमेश्वर ने याकूब (इस्राएल) को व्यवस्था विधान दिया।

11 परमेश्वर ने कहा था, “कनान की भूमि मैं तुमको दूँगा।

12 परमेश्वर ने वह वचन दिया था, जब इब्राहीम का परिवार छोटा था

13 वे राष्ट्र से राष्ट्र में,

14 किन्तु परमेश्वर ने उस घराने को दूसरे लोगों से हानि नहीं पहुँचने दी।

15 परमेश्वर ने कहा था, “मेरे चुने हुए लोगों को तुम हानि मत पहूँचाओ।

16 परमेश्वर ने उस देश में अकाल भेजा।

17 किन्तु परमेश्वर ने एक व्यक्ति को उनके आगे जाने को भेजा जिसका नाम यूसुफ था।

18 उन्होंने यूसुफ के पाँव में रस्सी बाँधी।

19 यूसुफ को तब तक बंदी बनाये रखा जब तक वे बातेंजो उसने कहीं थी सचमुच घट न गयी।

20 मिस्र के राजा ने इस तरह आज्ञा दी कि यूसुफ के बंधनों से मुक्त कर दिया जाये।

21 यूसुफ को अपने घर बार का अधिकारी बना दिया।

22 यूसुफ अन्य प्रमुखों को निर्देश दिया करता था।

23 फिर जब इस्राएल मिस्र में आया।

24 याकूब के वंशज बहुत से हो गये।

25 इसलिए मिस्री लोग याकूब के घराने से घृणा करने लगे।

26 इसलिए परमेश्वर ने निज दास मूसा

27 परमेश्वर ने हाम के देश में मूसा

28 परमेश्वर ने गहन अधंकार भेजा था,

29 सो फिर परमेश्वर ने पानी को खून में बदल दिया,

30 और फिर बाद में मिस्रियों का देश मेढ़कों से भर गया।

31 परमेश्वर ने आज्ञा दी मक्खियाँ

32 परमेश्वर ने वर्षा को ओलों में बदल दिया।

33 परमेश्वर ने मिस्रियों की अंगूर की बाड़ी और अंजीर के पेड़ नष्ट कर दिये।

34 परमेश्वर ने आज्ञा दी और टिड्डी दल आ गये।

35 टिड्डी दल और टिड्डे उस देश के सभी पौधे चट कर गये।

36 फिर परमेश्वर ने मिस्रियों के पहलौठी सन्तान को मार डाला।

37 फिर परमेश्वर निज भक्तों को मिस्र से निकाल लाया।

38 परमेश्वर के लोगों को जाते हुए देख कर मिस्र आनन्दित था,

39 परमेश्वर ने कम्बल जैसा एक मेघ फैलाया।

40 लोगों ने खाने की माँग की और परमेश्वर उनके लिये बटेरों को ले आया।

41 परमेश्वर ने चट्टान को फाड़ा और जल उछलता हुआ बाहर फूट पड़ा।

42 परमेश्वर ने अपना पवित्र वचन याद किया।

43 परमेश्वर अपने विशेष को मिस्र से बाहर निकाल लाया।

44 फिर परमेश्वर ने निज भक्तों को वह देश दिया जहाँ और लोग रह रहे थे।

45 परमेश्वर ने ऐसा इसलिए किया ताकि लोग उसकी व्यवस्था माने।

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