Salmos 77

पवित्र बाइबल (HIN2010)

1 मैं सहायता पाने के लिये परमेश्वर को पुकारूँगा।

2 हे मेरे स्वामी, मुझ पर जब दु:ख पड़ता है, मैं तेरी शरण में आता हूँ।

3 मैं परमेश्वर का मनन करता हूँ, और मैं जतन करता रहता हूँ कि मैं उससे बात करूँ और बता दूँ कि मुझे कैसा लग रहा है।

4 तू मुझे सोने नहीं देगा।

5 मैं अतीत की बातें सोचते रहा।

6 रात में, मैं निज गीतों के विषय़ में सोचता हूँ।

7 मुझको यह हैरानी है, “क्या हमारे स्वमी ने हमे सदा के लिये त्यागा है

8 क्या परमेश्वर का प्रेम सदा को जाता रहा

9 क्या परमेश्वर भूल गया है कि दया क्या होती है

10 फिर यह सोचा करता हूँ, “वह बात जो मुझे खाये डाल रही है:

11 याद करो वे शाक्ति भरे काम जिनको यहोवा ने किये।

12 मैंने उन सभी कामों को जिनको तूने किये है मनन किया।

13 हे परमेश्वर, तेरी राहें पवित्र हैं।

14 तू ही वह परमेश्वर है जिसने अद्भुत कार्य किये।

15 तूने निज शक्ति का प्रयोग किया और भक्तों को बचा लिया।

16 हे परमेश्वर, तुझे सागर ने देखा और वह डर गया।

17 सघन मेघों से उनका जल छूट पड़ा था।

18 कौंधती बिजली में झँझावान ने तालियाँ बजायी जगत चमक—चमक उठा।

19 हे परमेश्वर, तू गहरे समुद्र में ही पैदल चला। तूने चलकर ही सागर पार किया।

20 तूने मुसा और हारून का उपयोग निज भक्तों की अगुवाई

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