Jó 15

पवित्र बाइबल (HIN2010)

1 इस पर तेमान नगर के निवासी एलीपज ने अय्यूब को उत्तर देते हुए कहा:

2 “अय्यूब, य़दि तू सचमुच बुद्धिमान होता तो रोते शब्दों से तू उत्तर न देता।

3 क्या तू सोचता है कि कोई बुद्धिमान पुरुष व्यर्थ के शब्दों से

4 अय्यूब, यदि तू मनमानी करता है

5 तू जिन बातों को कहता है वह तेरा पाप साफ साफ दिखाती हैं।

6 तू उचित नहीं यह प्रमाणित करने की मुझे आवश्यकता नहीं है।

7 “अय्यूब, क्या तू सोचता है कि जन्म लेने वाला पहला व्यक्ति तू ही है?

8 क्या तूने परमेश्वर की रहस्यपूर्ण योजनाऐं सुनी थी

9 अय्यूब, तू हम से अधिक कुछ नहीं जानता है।

10 वे लोग जिनके बाल सफेद हैं और वृद्ध पुरुष हैं वे हमसे सहमत रहते हैं।

11 परमेश्वर तुझको सुख देने का प्रयत्न करता है,

12 अय्यूब, क्यों तेरा हृदय तुझे खींच ले जाता है

13 जब तू इन क्रोध भरे वचनों को कहता है,

14 “सचमुच कोई मनुष्य पवित्र नहीं हो सकता।

15 यहाँ तक कि परमेश्वर अपने दूतों तक का विश्वास नहीं करता है।

16 मनुष्य तो और अधिक पापी है।

17 “अय्यूब, मेरी बात तू सुन और मैं उसकी व्याख्या तुझसे करूँगा।

18 मैं तुझको वे बातें बताऊँगा,

19 केवल उनके पूर्वजों को ही देश दिया गया था।

20 दुष्ट जन जीवन भर पीड़ा झेलेगा और क्रूर जन

21 उसके कानों में भयंकर ध्वनियाँ होगी।

22 दुष्ट जन बहुत अधिक निराश रहता है और उसके लिये कोई आशा नहीं है, कि वह अंधकार से बच निकल पाये।

23 वह इधर—उधर भटकता हुआ फिरता है किन्तु उसकी देह गिद्धों का भोजन बनेगी।

24 चिंता और यातनाऐं उसे डरपोक बनाती है और ये बातें उस पर ऐसे वार करती है,

25 क्यो क्योंकि दुष्ट जन परमेश्वर की आज्ञा मानने से इन्कार करता है, वह परमेश्वर को घूसा दिखाता हैय?

26 वह दुष्ट जन बहुत हठी है।

27 दुष्ट जन के मुख पर चर्बी चढ़ी रहती है।

28 किन्तु वह उजड़े हुये नगरों में रहेगा।

29 दुष्ट जन अधिक समय तक

30 दुष्ट जन अन्धेरे से नहीं बच पायेगा।

31 दुष्ट जन व्यर्थ वस्तुओं के भरोसे रह कर अपने को मूर्ख न बनाये

32 दुष्ट जन अपनी आयु के पूरा होने से पहले ही बूढ़ा हो जायेगा और सूख जायेगा।

33 दुष्ट जन उस अंगूर की बेल सा होता है जिस के फल पकने से पहले ही झड़ जाते हैं।

34 क्यों क्योंकि परमेश्वर विहीन लोग खाली हाथ रहेंगे।

35 वे पीड़ा का कुचक्र रचते हैं और बुरे काम करते हैं।

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