1 तब नआमथवासी ज़ोफर ने कहना प्रारंभ किया:
2 “मेरे विचारों ने मुझे प्रत्युत्तर के लिए प्रेरित किया
3 मैंने उस झिड़की की ओर ध्यान दिया,
4 “क्या आरंभ से तुम्हें इसकी वास्तविकता मालूम थी,
5 अल्पकालिक ही होता है, दुर्वृत्त का उल्लास
6 भले ही उसका नाम आकाश तुल्य ऊंचा हो
7 वह कूड़े समान पूर्णतः मिट जाता है;
8 वह तो स्वप्न समान टूट जाता है, तब उसे खोजने पर भी पाया नहीं जा सकता,
9 जिन नेत्रों ने उसे देखा था, उनके लिए अब वह अदृश्य है;
10 उसके पुत्रों की कृपा दीनों पर बनी रहती है
11 उसकी हड्डियां उसके यौवन से भरी हैं
12 “यद्यपि उसके मुख को अनिष्ट का स्वाद लग चुका है
13 यद्यपि वह इसकी आकांक्षा करता रहता है,
14 फिर भी उसका भोजन उसके पेट में उथल-पुथल करता है;
15 उसने तो धन-संपत्ति निगल रखी है, किंतु उसे उगलना ही होगा;
16 वह तो नागों के विष को चूस लेता है;
17 वह नदियों की ओर दृष्टि नहीं कर पाएगा, उन नदियों की ओर,
18 वह अपनी उपलब्धियों को लौटाने लगा है, इसका उपभोग करना उसके लिए संभव नहीं है;
19 क्योंकि उसने कंगालों पर अत्याचार किए हैं तथा उनका त्याग कर दिया है;
20 “इसलिये कि उसका मन विचलित था;
21 खाने के लिये कुछ भी शेष न रह गया;
22 जब वह परिपूर्णता की स्थिति में होगा तब भी वह संतुष्ट न रह सकेगा;
23 जब वह पेट भरके खा चुका होगा, परमेश्वर
24 संभव है कि वह लौह शस्त्र के प्रहार से बच निकले
25 यह बाण उसकी देह में से खींचा जाएगा, और यह उसकी पीठ की ओर से बाहर आएगा,
26 घोर अंधकार उसकी संपत्ति की प्रतीक्षा में है.
27 स्वर्ग ही उसके पाप को उजागर करेगा;
28 उसके वंश का विस्तार समाप्त हो जाएगा,
29 यही होगा परमेश्वर द्वारा नियत दुर्वृत्त का भाग, हां,