2 Samuel 22

पवित्र बाइबल (HIN2010)

1 यहोवा ने दाऊद को शाऊल तथा अन्य सभी शत्रुओं से बचाया था। दाऊद ने उस समय यह गीत गाया,

2 यहोवा मेरी चट्टान, मरा गढ़ मेरा शरण—स्थल है।

3 मैं सहायता पाने को परमेश्वर तक दौड़ूँगा।

4 उन्होंने मेरा उपहास किया।

5 मेरे शत्रु मुझे मारना चाहते थे।

6 विपत्तियाँ बाढ़—सी आई, उन्होंने मुझे भयभीत किया।

7 मैं विपत्ति में था, किन्तु मैंने यहोवा को पुकारा।

8 तब धरती में कम्पन हुआ, धरती डोल उठी,

9 उसकी नाक से धुआँ निकला,

10 यहोवा ने आकाश को फाड़ कर खोल डाला,

11 यहोवा करूब (स्वर्गदूत) पर बैठा, और उड़ा,

12 यहोवा ने तुम्बू—से काले मेघों को अपने चारों ओर लपेट लिया,

13 उसका तेज इतना प्रखर था,

14 यहोवा गगन से गरज! परमेश्वर,

15 यहोवा ने बाण से शत्रुओं को बिखराया,

16 धरती की नींव का आवरण हट गया,

17 यहोवा गगन से नीचे पहुँचा, यहोवा ने मुझे पकड़ लिया,

18 उसने उन लोगों से बचाया, जो घृणा करते थे,

19 मैं विपत्ति में था, जब मेरे शत्रुओं का मुझ पर आक्रमण हुआ,

20 यहोवा मुझे सुरक्षा में ले आया, उसने मेरी रक्षा की,

21 यहोवा मुझे पुरस्कार देता है, क्योंकि मैंने उचित किया।

22 क्यों? क्योंकि मैंने यहोवा के नियमों का पालन किया।

23 मैं सदा याद करता हूँ यहोवा का निर्णय,

24 यहोवा जानता है—मैं अपराधी नहीं हूँ,

25 यही कारण है कि यहोवा मुझे पुरस्कार देता है, मैं न्यायोचित रहता हूँ।

26 यदि कोई व्यक्ति तुझसे प्रेम करेगा तो तू, अपनी प्रेमपूर्ण दया उस पर करोगा।

27 यदि कोई तेरे लिये अच्छा जीवन बिताता है, तब तू भी उसके लिये अच्छा बनेगा।

28 तू विपत्ति में विन्रम लोगों को बचायेगा,

29 यहोवा तू मेरा दीपक है,

30 तू सैनिकों के दल को हराने में, मेरी सहायता करता है।

31 परमेश्वर की शक्ति पूर्ण है।

32 यहोवा के अतिरिक्त कोई अन्य परमेश्वर नहीं,

33 परमेश्वर मेरा दृढ़ गढ़ है

34 यहोवा मेरे पैरों को हिरन के पैरों—सा तेज बनाता है,

35 यहोवा मुझे युद्ध की शिक्षा देता है, अत:

36 तू ढाल की तरह, मेरी रक्षा करता है।

37 तूने मेरा मार्ग विस्तृत किया है,

38 मैंने अपने शत्रुओं का पीछा किया, मैंने उन्हें नष्ट किया,

39 मैंने अपने शत्रुओं को नष्ट किया है,

40 परमेश्वर तूने मुझे युद्ध के लिये, शक्तिशाली बनाया।

41 तूने मेरे शत्रुओं को भगाया है,

42 मेरे शत्रुओं ने सहायता चाही,

43 मैं अपने शत्रुओं को कूटकर टुकड़े—टुकड़े करता हूँ,

44 तूने तब भी मुझे बचाया है, जब मेरे लोगों ने मेरे विरुद्ध लड़ाई की।

45 अन्य देशों के लोग मेरी आज्ञा मानते हैं,

46 अन्य देशों के लोग भयभीत होंगे,

47 यहोवा शाश्वत है,

48 वह परमेश्वर है, जो मेर शत्रुओं को मेरे लिये दण्ड देता है।

49 वह मुझे मेरे शत्रुओं से मुक्त करता है।

50 यहोव, इसी कारण, हे यहोवा मैंने राष्ट्रों के बीच में तुझ को धन्यवाद दिया,

51 यहोवा अपने राजा की सहायता, युद्ध में विजय पाने में करता है,

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