Atos 23

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1 पौलुस ने महासभा का तरफ टकटकी लगैइ खे देख्यो, अरु बोल्यो, हे इस्त्राएली भैइहोन, मेने आज तक परमेश्वर का लिये बिलकुल सच्चा विवेक से जिवन बितायो हइ.

2 हनन्याह महायाजक ने, उनका जो ओका पास खडो थो, ओका गाल पर थप्पड मारन कि आज्ञा दी.

3 तब पौलुस ने ओकासे बोल्यो, “ हे चुन्नो फिरी हुइ दिवाल, परमेश्वर तोखे मार्येका तू मूसा का नीयम का जसो मरो न्याय करण का लिये बठ्यो हइ, अरु फिर व्यवस्था का विरुध्द मेखे मारन कि आज्ञा देस हइ?”

4 जो दुन्या पौलुस का पास खडा था, “उनने बोल्यो, तू परमेश्वर को महायाजक खे बुरो-भलो बोलस हइ.”

5 पौलुस ने बोल्यो, “हे इस्त्राएली भैइहोन, मी नी जानतो थो, कि यो महायाजक हइ. क्युकि लिख्यो हइ, अपना दुन्या का प्रधान खे बुरो नी बोलनु.”

6 तब पौलुस ने यो जानी खे कि एक दल सदूकिहोन अरु दूसरा फिरीसिहोन को हइ, महासभा मे पुकारी खे बोल्यो, “हे भैइहोन मी फरीसी अरु फिरीसीहोन को वंश को हइ, मर्या हुया कि आस अरु पुनरुत्थान का बारे मे मरो मेकदमो हुइ र्‍हो हइ.”

7 जब ओने या बात बोली ते फरीसीहोन अरु सदूकिहोन मे वाद विवाद होन लग्यो. अरु सभा मे फुट पडी गइ.

8 क्युकि सदूकि तो यो बोलस हइ, कि नी पुनरुत्थान हइ, नी स्वर्गदूत अरु नी आत्मा हइ. पन फरीसी यो सब खे मानस हइ.

9 तब बडो हल्लो मच्यो अरु कुछ मूसा को नीयम को शिक्षक जो फरीसीहोन को दल को थो, उठी खे यो बोलि खे झगडन लग्या, “हम यो इन्सान मे कुछ बुराइ नी पाय. अरु अगर कोय आत्मा या स्वर्गदूत ओकासे बोल्यो हइ ते फिर का”

10 जब भोत वाद विवाद हुयो, ते सेनादल को सरदार ने या डर से कि वे पौलुस का टुकडा टुकडा नी करी नी डाल्येका सेनादल खे आज्ञा दी कि उतरी खे ओखे उनका बय मे से जबरदस्ती नीकलनु, अरु किल्ला मे लि आनू.

11 उय रात प्रभु ने ओका पास अयखे खडो हुइ खे बोल्यो, “हे पौलुस हिम्मत रख क्युकि जसो तोने यरुशलेम मे मरी गवइ दी, वसो ही तोखे रोम मे भी गवइ देनु पड्ये.”

12 जब दिन हुयो, ते यहूदीयाहोन ने इकठ्ठा हुया अरु साजीस रच्यो, अरु कसम खय कि जब तक हम पौलुस खे मारी नी डाल्ये अगर हम खाया या पीया ते हम पर धिक्कर.

13 जेने या कसम खे खाय थी वे चालीस जन से जादा था.

14 उनने प्रधान याजकहोन का पास अय खे बोल्यो, “हमने यो ठान्यो हइ कि जब तक हम पौलुस खे मारी नी डाल्येका तब तक अगर कुछ भी खाये ते हम पर धिकार हइ.

15 अरु फिर यहूदीया समेत सेनादल का सरदार का समझानु, कि ओखे तुम्हारा पास लि अयखे मानु कि तुम ओका बारे मे अरु ओका पहुचना से पइले हि ओखे मारी डालन का लिये तैयार र्‍हिये.”

16 अरु पौलुस की भैइन ने सुन्यो कि वे ओखे मारी डालन कि ताक मे हइ, ते सैनीकहोन किल्ला मे जैइ खे पौलु खे सन्देशो दियो.

17 पौलुस ने सुबेदार मे से एक, “पलटन को सरदार का पास लि जानु का यो जवान ओका से कुछ बोलनु चाहस हइ.”

18 आखरी. ओने ओखे पलटन का सरदार का पास लि जैइ खे बोल्यो, बन्दी पौलुस ने मेखे बुलैइ, प्रार्थना करी खे की यो जवान खे पलटन का सरदार से कुछ बोलनु चाहस हइ. येखे ओखा पास लि जा.

19 पलटन का सरदार ने ओको हाथ पकडी खे अरु ओखे अलग लि जैइ खे पुच्छो, “तू मरासे का बोलनु चाहस हइ?”

20 .ओने बोल्यो, “यहूदीयाहोन ने साजिस रची हइ, कि तरासे प्रार्थना करी कि कल पौलुस खे महासभा मे लानु, मानो तू अरु ठीक से ओकी जाच करणु चाहस हइ.

21 पन उनकी नी माननु, क्युकि उनमे से चालीस का उपर इन्सान ओको घात मे हइ, जोन्हे यो ठानी लियो हइ कि जब तक वे पौलुस खे मारी नी डाले, तब तक नी खाये अरु पीये अरु अब वे तैयार हइ अरु तरो बोलन कि रस्ता देखी र्‍हा हइ.”

22 तब पलटन को सरदार ने जवान खे यो बतैइ खे बिदा कर्यो, “कोय से नी बोलनु कि तोने मेखे या बातहोन बतैइ हइ.”

23 फिर ओने तब दो सुबेदार खे बुलैइ खे बोल्यो, “दो सौ सैनीक का सत्तर घोड सवार को अरु दो सौ भालाआला के कैसरिया जान का लिये तैयार करी रख, तू रात खे नउ बजो नीकलनु.

24 अरु पौलुस की सवारी का लिये घोडा तैयार रखनु कि ओखे फेलिक्स राज्यपाल का पास सुरक्षित पहुच्यैइ दे.”

25 सेनापती ने यो प्रकार कि चिठ्ठी भी लिखी.

26 “महाप्रतापी फेलिक्स राज्यपाल खे क्लौदियुस लूसियास को नमस्कार.

27 यो इन्सान खे यहूदीयाहोन ने पकडी खे मार डालनो चायो, पन जब मेने जान्यो कि उ रोमी हइ, ते पलटन लिखे छुड्य लायो.

28 अरु मी जाननु चाहतो थो, कि वे ओका पर कोपय करण दोष लगास हइ, येका लिये ओखे नीच्चे उनकी महासभा मे लि गयो.

29 तब मेने जानी लियो, उनकी व्यवस्था को झगडाहोन का बारे मे ओ पर दोष लगास हइ, पन मारी डाल्या जाना या बाधी जान को योग्य ओमे कोय दोष नी.

30 अरु जब मेखे बतायो गयो, कि वे यो इन्सान खे मारना मे लग्या हइ ते मेने जल्दी ओखे तरा पास भेजी दियो. अरु दोश लगान आला खे भी आज्ञा दी, उनका लगाया हुया दोष तरा सामने रखन.”

31 आखरी जसो सैनीकहोन खे आज्ञा दी गइ थी, वसो ही पौलुस खे लि खे रातो-रात अन्तिपत्रिस नजीकपास ओका पास पहुचनु.

32 दुसरा दिन घोडसवारहोन पौलुस का साथ आगे जान, लिये परदल चलन आला सैनीकहोन ने किल्ला मे छोडी दियो.

33 उनने कैसरिया मे पहुची, राज्यपाल खे चिठ्ठी दी. अरु पौलुस खे भी ओका सामने खडो कर्यो.

34 ओने पडी खे पूछो, “यो कोनता देश को हइ?” अरु जब जानी गयो कि किलिकिया को हइ.

35 ओने बोल्यो, जब तरा दोष लगान आला भी अयखे ते मी तरो मुकद्दमो कर्यु, अरु ओने उ हेरोदेस का किल्ला मे, पहरा मे रखन कि आज्ञा दी.

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