Mateus 19

पवित्र बाइबल (HIN2010) vs NAA

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NAA Nova Almeida Atualizada 2017
1 ये बातें कहने के बाद वह गलील से लौट कर यहूदिया के क्षेत्र में यर्दन नदी के पार चला गया।
1 Quando Jesus acabou de proferir estas palavras, deixou a Galileia e foi para o território da Judeia, além do Jordão.
2 एक बड़ी भीड़ वहाँ उसके पीछे हो ली, जिसे उसने चंगा किया।
2 Grandes multidões o seguiram, e ele as curou ali.
3 उसे परखने के जतन में कुछ फ़रीसी उसके पास पहुँचे और बोले, “क्या यह उचित है कि कोई अपनी पत्नी को किसी भी कारण से तलाक दे सकता है?”
3 Alguns fariseus se aproximaram de Jesus e, testando-o, perguntaram: — É lícito ao homem repudiar a sua mulher por qualquer motivo?
4 उत्तर देते हुए यीशु ने कहा, “क्या तुमने शास्त्र में नहीं पढ़ा कि जगत को रचने वाले ने प्रारम्भ में, ‘उन्हें एक स्त्री और एक पुरुष के रूप में रचा था?’
4 Jesus respondeu:
5 और कहा था ‘इसी कारण अपने माता-पिता को छोड़ कर पुरुष अपनी पत्नी के साथ दो होते हुए भी एक शरीर होकर रहेगा।’
5 e que disse: “Por isso o homem deixará o seu pai e a sua mãe e se unirá à sua mulher, tornando-se os dois uma só carne”?
6 सो वे दो नहीं रहते बल्कि एक रूप हो जाते हैं। इसलिए जिसे परमेश्वर ने जोड़ा है उसे किसी भी मनुष्य को अलग नहीं करना चाहिये।”
6 De modo que já não são mais dois, porém uma só carne. Portanto, que ninguém separe o que Deus ajuntou.
7 वे बोले, “फिर मूसा ने यह क्यों निर्धारित किया है कि कोई पुरुष अपनी पत्नी को तलाक दे सकता है। शर्त यह है कि वह उसे तलाक नामा लिख कर दे।”
7 Os fariseus perguntaram: — Então por que Moisés ordenou dar uma carta de divórcio e repudiar a mulher?
8 यीशु ने उनसे कहा, “मूसा ने यह विधान तुम लोगों के मन की जड़ता के कारण दिया था। किन्तु प्रारम्भ में ऐसी रीति नहीं थी।
8 Jesus respondeu:
9 तो मैं तुमसे कहता हूँ कि जो व्यभिचार को छोड़कर अपनी पत्नी को किसी और कारण से त्यागता है और किसी दूसरी स्त्री की ब्याहता है तो वह व्यभिचार करता है।”
9 Eu, porém, lhes digo: quem repudiar a sua mulher, não sendo por causa de relações sexuais ilícitas, e casar com outra comete adultério.
10 इस पर उसके शिष्यों ने उससे कहा, “यदि एक स्त्री और एक पुरुष के बीच ऐसी स्थिति है तो किसी को ब्याह ही नहीं करना चाहिये।”
10 Os discípulos de Jesus disseram: — Se essa é a situação do homem em relação à sua mulher, não convém casar.
11 फिर यीशु ने उनसे कहा, “हर कोई तो इस उपदेश को ग्रहण नहीं कर सकता। इसे बस वे ही ग्रहण कर सकते हैं जिनको इसकी क्षमता प्रदान की गयी है।
11 Jesus, porém, lhes respondeu:
12 कुछ ऐसे हैं जो अपनी माँ के गर्भ से ही नपुंसक पैदा हुए हैं। और कुछ ऐसे हैं जो लोगों द्वारा नपुंसक बना दिये गये हैं। और अंत में कुछ ऐसे हैं जिन्होंने स्वर्ग के राज्य के कारण विवाह नहीं करने का निश्चय किया है। जो इस उपदेश को ले सकता है ले।”
12 Porque há eunucos de nascença; há outros a quem os homens fizeram tais; e há outros que se fizeram eunucos, por causa do Reino dos Céus. Quem é apto para aceitar isto, que aceite.
13 फिर लोग कुछ बालकों को यीशु के पास लाये कि वह उनके सिर पर हाथ रख कर उन्हें आशीर्वाद दे और उनके लिए प्रार्थना करे। किन्तु उसके शिष्यों ने उन्हें डाँटा।
13 Então trouxeram algumas crianças a Jesus para que ele lhes impusesse as mãos e orasse, mas os discípulos os repreendiam.
14 इस पर यीशु ने कहा, “बच्चों को रहने दो, उन्हें मत रोको, मेरे पास आने दो क्योंकि स्वर्ग का राज्य ऐसों का ही है।”
14 Jesus, porém, disse:
15 फिर उसने बच्चों के सिर पर अपना हाथ रखा और वहाँ से चल दिया।
15 E, tendo-lhes imposto as mãos, retirou-se dali.
16 वहीं एक व्यक्ति था। वह यीशु के पास आया और बोला, “गुरु अनन्त जीवन पाने के लिए मुझे क्या अच्छा काम करना चाहिये?”
16 E eis que alguém, aproximando-se de Jesus, lhe perguntou: — Mestre, que farei de bom para alcançar a vida eterna?
17 यीशु ने उससे कहा, “अच्छा क्या है, इसके बारे में तू मुझसे क्यों पूछ रहा है? क्योंकि अच्छा तो केवल एक ही है! फिर भी यदि तू अनन्त जीवन में प्रवेश करना चाहता है, तो तू आदेशों का पालन कर।”
17 Jesus respondeu:
18 उसने यीशु से पूछा, “कौन से आदेश?”
18 E ele lhe perguntou: — Quais? Jesus respondeu:
19 ‘अपने पिता और अपनी माता का आदर कर’ और ‘जैसे तू अपने आप को प्यार करता है, ‘वैसे ही अपने पड़ोसी से भी प्यार कर।’”
19 honre o seu pai e a sua mãe e ame o seu próximo como você ama a si mesmo.”
20 युवक ने यीशु से पूछा, “मैंने इन सब बातों का पालन किया है। अब मुझ में किस बात की कमी है?”
20 O jovem disse: — Tudo isso tenho observado. O que me falta ainda?
21 यीशु ने उससे कहा, “यदि तू संपूर्ण बनना चाहता तो जा और जो कुछ तेरे पास है, उसे बेचकर धन गरीबों में बाँट दे ताकि स्वर्ग में तुझे धन मिल सके। फिर आ और मेरे पीछे हो ले!”
21 Jesus respondeu:
22 किन्तु जब उस नौजवान ने यह सुना तो वह दुःखी होकर चला गया क्योंकि वह बहुत धनवान था।
22 Mas o jovem, ouvindo esta palavra, retirou-se triste, porque era dono de muitas propriedades.
23 यीशु ने अपने शिष्यों से कहा, “मैं तुमसे सत्य कहता हूँ कि एक धनवान का स्वर्ग के राज्य में प्रवेश कर पाना कठिन है।
23 Então Jesus disse aos seus discípulos:
24 हाँ, मैं तुमसे कहता हूँ कि किसी धनवान व्यक्ति के स्वर्ग के राज्य में प्रवेश पाने से एक ऊँट का सूई के नकुए से निकल जाना आसान है।”
24 E ainda lhes digo que é mais fácil um camelo passar pelo fundo de uma agulha do que um rico entrar no Reino de Deus.
25 जब उसके शिष्यों ने यह सुना तो अचरज से भरकर पूछा, “फिर किस का उद्धार हो सकता है?”
25 Ouvindo isto, os discípulos ficaram muito admirados e perguntaram: — Sendo assim, quem pode ser salvo?
26 यीशु ने उन्हें देखते हुए कहा, “मनुष्यों के लिए यह असम्भव है, किन्तु परमेश्वर के लिए सब कुछ सम्भव है।”
26 Jesus, olhando para eles, disse:
27 उत्तर में तब पतरस ने उससे कहा, “देख, हम सब कुछ त्याग कर तेरे पीछे हो लिये हैं। सो हमें क्या मिलेगा?”
27 Então Pedro, tomando a palavra, disse: — Eis que nós deixamos tudo e seguimos o senhor; que será, pois, de nós?
28 यीशु ने उनसे कहा, “मैं तुम लोगों से सत्य कहता हूँ कि नये युग में जब मनुष्य का पुत्र अपने प्राप्ती सिंहासन पर विराजेगा तो तुम भी, जो मेरे पीछे हो लिये हो, बाहर सिंहासनों पर बैठकर परमेश्वर के लोगों का न्याय करोगे।
28 Jesus lhes respondeu:
29 और मेरे लिए जिसने भी घर-बार या भाईयों या बहनों या पिता या माता या बच्चों या खेतों को त्याग दिया है, वह सौ गुणा अधिक पायेगा और अनन्त जीवन का भी अधिकारी बनेगा।
29 E todo aquele que tiver deixado casas, irmãos, irmãs, pai, mãe, filhos ou campos, por causa do meu nome, receberá muitas vezes mais e herdará a vida eterna.
30 किन्तु बहुत से जो अब पहले हैं, अन्तिम हो जायेंगे और जो अन्तिम हैं, पहले हो जायेंगे।”
30 Porém muitos primeiros serão últimos; e os últimos serão primeiros.

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