2 Reis 2

पवित्र बाइबल (HIN2010)

1 यह लगभग वह समय था जब यहोवा ने एक तूफान के द्वारा एलिय्याह को स्वर्ग में बुला लिया। एलिय्याह एलीशा के साथ गिलगाल गया।

2 एलिय्याह ने एलीशा से कहा, “कृपया यहीं रुको, क्योंकि यहोवा ने मुझे बेतेल जाने को कहा है।”

3 बेतेल के नबियों का समूह एलीशा के पास आया और उसने एलीशा से कहा, “क्या तुम जानते हो कि आज तुम्हारे स्वामी को यहोवा तुमसे अलग करके ले जाएगा”

4 एलिय्याह ने एलीशा से कहा, “कृपया यहीं ठहरो क्योंकि यहोवा ने मुझे यरीहो जाने को कहा है।”

5 यरीहो के नबियों का समूह एलीशा के पास आया और उन्होंने उससे कहा, “क्या तुमको मालूम है कि यहोवा आज तुम्हारे स्वामी को तुमसे दूर ले जाएगा।”

6 एलिय्याह ने एलीशा से कहा, “कृपया यहीं ठहरो क्योंकि यहोवा ने मुझे यरदन नदी तक जाने को कहा है।”

7 नबियों के समूह में से पचास व्यक्तियों ने उनका अनुसरण किया। एलिय्याह और एलीशा यरदन नदी पर रुक गए। पचास व्यक्ति एलिय्याह और एलीशा से बहुत दूर खड़े रहे।

8 एलिय्याह ने अपना अंगरखा उतारा, उसे तह किया और उससे पानी पर चोट की। पानी दायीं और बायीं ओर को फट गया। एलिय्याह और एलीशा ने सूखी भूमि पर चलकर नदी को पार किया।

9 जब उन्होंने नदी को पार कर लिया तब एलिय्याह ने एलीशा से कहा, “इससे पहले कि परमेश्वर मुझे तुमसे दूर ले जाए, तुम क्या चाहते हो कि मैं तुम्हारे लिए करुँ।”

10 एलिय्याह ने कहा, “तुमने कठिन चीज़ माँगी है। यदि तुम मुझे उस समय देखोगे जब मुझे ले जाया जाएगा तो वही होगा। किन्तु यदि तुम मुझे नहीं देख पाओगे तो वह नहीं होगा।”

11 एलिय्याह और एलीशा एक साथ बातें करते हुए टहल रहे थे। अचानक कुछ घोड़े और एक रथ आया और उन्होंने एलिय्याह को एलीशा से अलग कर दिया। घोड़े और रथ आग के समान थे। तब एलिय्याह एक बवंडर में स्वर्ग को चला गया।

12 एलीशा ने इसे देखा और जोर से पुकारा, “मेरे पिता! मेरे पिता! इस्राएल के रथ और उसके अश्वारोही सैनिक!”

13 एलिय्याह का अंगरखा भूमि पर गिर पड़ा था अतः एलीशा ने उसे उठा लिया। एलीशा ने पानी पर चोट की और कहा, “एलिय्याह का परमेश्वर यहोवा, कहाँ है”

14 जैसे ही एलीशा ने पानी पर चोट की, पानी दाँयी और बांयी ओर को फट गया और एलीशा ने नदी पार की।

15 जब यरीहो के नबियों के समूह ने एलीशा को देखा, उन्होंने कहा, “एलिय्याह की आत्मा अब एलीशा पर है।” वे एलीशा से मिलने आए। वे एलीशा के सामने नीचे भूमि तक प्रणाम करने झुके।

16 उन्होंने उससे कहा, “देखो, हम अच्छे खासे पचास व्यक्ति हैं। कृपया इनको जाने दो और अपने स्वामी की खोज करने दो। सम्भव है यहोवा की शक्ति ने एलिय्याह को ऊपर ले लिया हो और उसे किसी पर्वत या घाटी में गिरा दिया हो!”

17 नबियों के समूह ने एलीशा से इतनी अधिक प्रार्थना की, कि वह उलझन में पड़ गया। तब एलीशा ने कहा, “ठीक है, एलिय्याह की खोज में आदमियों को भेज दो।”

18 अतः वे लोग यरीहो गए जहाँ एलीशा ठहरा था। उन्होंने उससे कहा कि वे एलिय्याह को नहीं पा सके। एलीशा ने उनसे कहा, “मैंने तुम्हें जाने को मना किया था।”

19 नगर के निवासियों ने एलीशा से कहा, “महोदय, आप अनुभव कर सकते हैं कि यह नगर सुन्दर स्थान में हैं। किन्तु यहाँ पानी बुरा है। यही कारण है कि भूमि में फसल की उपज नहीं होती।”

20 एलीशा ने कहा, “मेरे पास एक नया कटोरा लाओ और उसमें नमक रखो।”

21 तब एलीशा उस स्थान पर गया जहाँ पानी भूमि से निकल रहा था। एलीशा ने नमक को पानी में फेंक दिया। उसने कहा, “यहोवा कहता है, ‘मैं इस पानी को शुद्ध करता हूँ। अब, मैं इस पानी से किसी को मरने न दूँगा, और न ही भूमि को अच्छी फसल देने से रोकूँगा।’”

22 पानी शुद्ध हो गया और पानी अब तक भी शुद्ध है। यह वैसा ही हुआ जैसा एलीशा ने कहा था।

23 उस नगर से एलीशा बेतेल गया। एलीशा नगर की ओर पहाड़ी पर चल रहा था जब कुछ लड़के नगर से नीचे आ रहे थे। वह एलीशा का मजाक उड़ाने लगे और उन्होंने कहा, “हे गन्जे, तू ऊपर चढ़ जा! हे गन्जे तू ऊपर चढ़ जा!”

24 एलीशा ने मुड़ कर उन्हें देखा। उसने यहोवा से बिनती की कि उन के साथ बुरा हो। उसी समय जंगल से दो रीछों ने आ कर उन लड़कों पर हमला किया, वहाँ बयालीस लड़के रीछों द्वारा फाड़ दिये गये।

25 वहाँ से एलीशा बेतेल होता हुआ कर्म्मेल पर्वत पर गया, उस के बाद वह शोमरोन पहुँचा।

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